मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ के धाम में गूंजेगी भारतीय कालगणना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ के धाम में गूंजेगी भारतीय कालगणना
कालगणना की पावन नगरी और ‘महाकाल’ के केंद्र उज्जैन से निकली भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी जीवंत हो उठी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर, भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बाबा काशी विश्वनाथ को अर्पित यह घड़ी भेंट की थी। इसके बाद विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया (4 अप्रैल, 2026) को इसे मंदिर परिसर में पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। यह मध्यप्रदेश सरकार के उस संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है, जिसके तहत देश के सभी ज्योतिर्लिंग और अयोध्या के राम मंदिर में भी वैदिक घड़ी की स्थापना की जानी है।

परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम
उज्जैन के ‘महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ’ द्वारा विकसित यह घड़ी केवल समय बताने वाला यंत्र नहीं, बल्कि भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का डिजिटल पुनर्जागरण है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित होती है और एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसकी विशेषता यह है कि यह स्थान-विशिष्ट सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर सटीक समय की गणना करती है। इस घड़ी के माध्यम से श्रद्धालु और युवा पीढ़ी न केवल भारतीय मानक समय (IST) जान सकेंगे, बल्कि पंचांग, तिथि, योग, नक्षत्र, भद्रा स्थिति और ग्रहों के गोचर जैसी सूक्ष्म जानकारियों से भी रूबरू हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह वैदिक घड़ी हमारे गौरवशाली अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देगी।

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी उज्जैन में स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण 29 फरवरी 2024 को फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया था।

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