देवास पटाखा फैक्ट्री हादसा : क्या बारूद माफिया को मिला संरक्षण?

देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मोहन सरकार की लापरवाही और बारूद माफिया के संरक्षण का परिणाम : जीतू पटवारी”*
देवास जिले के टोंक कलां क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जितेंद्र (जीतू) पटवारी जी ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए घटना को प्रशासनिक लापरवाही, अवैध संरक्षण और माफिया तंत्र की मिलीभगत का परिणाम बताया है।
आज देवास पहुंचकर श्री जीतू पटवारी ने हादसे में घायल परिजनों एवं पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा इस दुख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मोहन सरकार की असफल व्यवस्था और प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी का भयावह उदाहरण है।
श्री पटवारी ने कहा कि टोंक कलां क्षेत्र में एक सरकारी अनुबंध वाले वेयरहाउस में अनाज भंडारण की जगह अवैध रूप से पटाखा फैक्ट्री संचालित की जा रही थी, जहाँ हुए भीषण विस्फोट में कई निर्दोष लोगों की दर्दनाक मृत्यु हो गई तथा अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैक्ट्री में पूर्व में भी कई बार आग लगने की घटनाएँ सामने आ चुकी थीं, लेकिन प्रशासन और सरकार ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं।
श्री पटवारी ने कहा कि अत्यंत चिंताजनक जानकारी सामने आई है कि इस फैक्ट्री में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों से जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और प्रशासन इस गंभीर अपराध पर मौन क्यों रहा?
श्री पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में माफियाओं का राज लगातार बढ़ता जा रहा है।
रेत माफिया,खनन माफिया,भू माफिया,शराब माफिया के बाद अब “बारूद माफिया” निर्दोष लोगों की जान ले रहा है और सरकार पूरी तरह निष्क्रिय बनी हुई है।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर प्रशासन क्या कर रहा था? क्यों बारूद के ढेर पर मासूम और नाबालिगों की जान जोखिम में डाली गई? आखिर अवैध फैक्ट्री को संरक्षण किसके इशारे पर मिल रहा था?
प्रदेश कांग्रेस ने इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग करते हुए कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं—
पटाखा फैक्ट्री में आखिर कितनी अनियमितताएँ और तकनीकी खामियाँ थीं?
क्या ग्रामीणों की शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
क्या कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की?
क्या अवैध निर्माण और पूर्व में हुई आगजनी की घटनाओं पर प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया?
क्या फैक्ट्री का लाइसेंस किसी और के नाम पर था और संचालन कोई अन्य व्यक्ति कर रहा था?
क्या लाइसेंस का बैक डेट में रिन्यूअल किया गया?
इस अवैध गतिविधि को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण कौन दे रहा था?
प्रदेश कांग्रेस ने मांग की है कि मृतकों के परिजनों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, घायलों को बेहतर उपचार तथा दोषियों पर तत्काल कठोर आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

